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सपा नेता रामजी लाल सुमन द्वारा राणा सांगा को 'गद्दार' कहे जाने पर मचा विवाद, जबकि राणा सांगा को भारत के इतिहास में एक महान राजपूत योद्धा और मेवाड़ के शासक के रूप में याद किया जाता है। |
Rana Sanga Controversy Update: एक मामला कुछ ऐसा है कि कुछ दिन पहले सपा के नेता और राज्यसभा सांसद रामजी लाल सुमन ने संसद में राणा सांगा को लेकर कुछ ऐसा कह दिया कि हर कोई हैरान रह गया। इस बयान से यूपी और बाकी देश में सियासत गरमा गई। सुमन ने राणा सांगा को 'गद्दार' कह दिया, और फिर क्या था, बीजेपी से लेकर तमाम लोग इस पर बुरी तरह उबल पड़े। वो क्या कह रहे थे, एक नजर डालते हैं।
सुमन का बयान
रामजी लाल सुमन ने संसद में कहा, "बीजेपी वाले हमेशा ये कहते रहते हैं कि मुसलमानों में बाबर का डीएनए है, तो फिर आपको यह भी बताना चाहिए कि बाबर को भारत में लाने वाला कौन था? वही तो राणा सांगा था। उसने ही बाबर को इब्राहीम लोदी को हराने के लिए बुलाया था। तो अगर आप बाबर के वंशज हैं, तो आप राणा सांगा के भी वंशज हैं, जो गद्दार थे।" अब सुमन के इस बयान से बीजेपी के नेताओं में हड़कंप मच गया। बीजेपी ने इसे राजपूत समाज और हिंदू समाज का अपमान बताया और सपा से माफी की मांग की।
अब ये बयान इतना विवादास्पद हो गया कि हर तरफ हंगामा मच गया। बीजेपी के नेताओं ने सुमन को खूब खरी-खोटी सुनाई और कहा कि सपा ने इतिहास को पूरी तरह से गलत तरीके से पेश किया है।
राणा सांगा कौन थे?
अब भाई, राणा सांगा का नाम सुनते ही हमारे दिमाग में एक ही तस्वीर आती है – एक बहादुर राजपूत योद्धा, जो न सिर्फ अपने राज्य मेवाड़ की रक्षा करता था, बल्कि भारत के इतिहास में एक महान शख्सियत के रूप में हमेशा याद किया जाता है। उनका असली नाम था महाराणा संग्राम सिंह, और वो मेवाड़ के शासक थे। 12 अप्रैल 1484 को जन्मे राणा सांगा ने 1508 से 1528 तक मेवाड़ की गद्दी संभाली।
राणा सांगा का जीवन बिल्कुल भी आसान नहीं था। उनका संघर्ष हमेशा से अपने राज्य और परिवार की रक्षा के लिए रहा। राजपूतों के बीच एकता लाने वाले राणा सांगा ने कई मुस्लिम शासकों के खिलाफ युद्ध लड़ा। उन्होंने दिल्ली सुलतानत और मुगल साम्राज्य को चुनौती दी। अब आप सोच रहे होंगे कि ये सब क्यों? भाई, ये राणा सांगा थे ही इतने वीर।
राणा सांगा ने अपने समय में जितने भी युद्ध लड़े, उनकी सेना ने कई मुस्लिम सुलतानतों को हराया। खासकर दिल्ली के लोदी वंश और बाद में मुगल सम्राट बाबर के खिलाफ।
सुमन का बयान पर बीजेपी की प्रतिक्रिया
बीजेपी के नेताओं को सुमन का यह बयान बिल्कुल भी पसंद नहीं आया। पूर्व सांसद संजीव बालियान ने तो इसे राजपूत समाज और हिंदू समाज का अपमान बताया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, "राणा सांगा को गद्दार कहना पूरी तरह से गलत है। यह हमारे इतिहास और संस्कृति का अपमान है। सपा को इस बयान के लिए माफी मांगनी चाहिए।"
बीजेपी के यूपी नेताओं ने कहा कि यह बयान तुष्टिकरण की राजनीति का हिस्सा है, और सपा ऐसे बयान देकर भारतीय महापुरुषों को नीचा दिखाने की कोशिश कर रही है। वो तो यह भी कहते हैं कि राणा सांगा ने भारत की रक्षा के लिए कई महत्वपूर्ण युद्ध लड़े, और उनकी वीरता का सम्मान किया जाना चाहिए।
राणा सांगा का इतिहास
तो अगर आप सोच रहे हैं कि राणा सांगा का इतिहास किसके लिए महत्वपूर्ण है, तो सुनिए। राणा सांगा ने न सिर्फ अपनी वीरता से मेवाड़ को एक ताकतवर राज्य बनाया, बल्कि उन्होंने राजपूतों को एकजुट किया। जब बाबर ने भारत पर हमला किया, तो राणा सांगा ने उसकी ताकत को चुनौती दी थी। हां, वो खानवा की लड़ाई में हार गए थे, लेकिन उनकी बहादुरी और कड़ी मेहनत को बाबर जैसे सम्राट ने भी माना था। बाबर ने अपनी किताब बाबरनामा में राणा सांगा की बहादुरी का जिक्र किया था। बाबर खुद ने राणा सांगा को एक बेहतरीन योद्धा माना था।
राणा सांगा का नाम हमेशा हिंदू साम्राज्य की रक्षा के प्रतीक के रूप में लिया जाएगा। उनकी वीरता के बारे में कोई दो राय नहीं हो सकती। वो वो योद्धा थे जिनके मुकाबले की कोई कल्पना भी नहीं कर सकता।
निष्कर्ष
अब इस पूरे मामले से एक बात तो साफ है कि राणा सांगा एक महान योद्धा थे और उनका योगदान भारत की रक्षा में हमेशा याद किया जाएगा। भले ही किसी ने उनका नाम गद्दार कहा हो, लेकिन राणा सांगा का असली इतिहास बहुत बड़ा था। हमें चाहिए कि हम इतिहास के साथ न्याय करें और हमारे महान योद्धाओं के योगदान को सही तरीके से जानें और सम्मान दें।
तो, आप क्या सोचते हैं? क्या राणा सांगा को ऐसे बयानों से गाली देना सही है? क्या हमें अपने इतिहास को सच्चाई के साथ समझना चाहिए?
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