26 मार्च 2025 को करणी सेना ने समाजवादी पार्टी (SP) के सांसद रामजी लाल सुमन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया, और यह विरोध उनकी हालिया विवादित टिप्पणी के कारण था। सुमन ने एक वीडियो में राजपूत योद्धा राणा संगाजी को “देशद्रोही” कहकर उनका अपमान किया था।
राणा संगाजी, जो मेवाड़ के महान शासक थे, भारतीय इतिहास में एक अत्यंत सम्मानित व्यक्तित्व माने जाते हैं। उनका संघर्ष और वीरता राजपूत समाज के लिए गौरव का प्रतीक है। सुमन का बयान इस पूरे सम्मान और गौरव का अपमान था। जब करणी सेना ने यह सुना, तो उनका गुस्सा फूटा, क्योंकि राजपूत समाज के लिए अपने नायकों का अपमान सहना असंभव है। यह केवल एक बयान नहीं था; यह पूरे समाज के गौरव का सवाल था, और जब कोई हमारे इतिहास और नायकों का अपमान करता है, तो इसका विरोध स्वाभाविक होता है। करणी सेना ने इसे न केवल एक व्यक्तिगत मामला समझा, बल्कि यह एक सामूहिक संस्कृति और धरोहर की रक्षा का मुद्दा बना।
करणी सेना ने बढ़ाया विरोध, घर के बाहर किया प्रदर्शन
सुमन के बयान के खिलाफ करणी सेना के कार्यकर्ता सक्रिय हो गए। प्रदर्शनकारियों ने सुमन के घर के बाहर विशाल प्रदर्शन किया और उनकी नीति के खिलाफ विरोध जताया। यह प्रदर्शन इतना उग्र हो गया कि करणी सेना के कार्यकर्ता बुलडोज़र लेकर सुमन के घर के पास पहुंचे, और इस दौरान उन्होंने न केवल विरोध का प्रतीक बने हुए गेट को तोड़ने की कोशिश की, बल्कि सुमन के घर के बाहर पार्क किए गए वाहनों को भी नुकसान पहुँचाया। इस प्रदर्शन का उद्देश्य केवल शारीरिक नुकसान नहीं था, बल्कि यह एक संदेश था—"हम इतिहास और हमारे महान नायकों का अपमान नहीं सहेंगे।" करणी सेना का यह कदम दिखाता है कि वे सिर्फ शब्दों से नहीं, बल्कि ठोस कदम उठाकर अपने नायकों और समाज की गरिमा को बचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
यह विरोध सिर्फ एक व्यक्ति के खिलाफ नहीं था, बल्कि यह पूरे समाज की आवाज़ थी, जो अपने नायकों की रक्षा के लिए खड़ा हुआ था। इस प्रदर्शन में न केवल करणी सेना के कार्यकर्ता शामिल हुए, बल्कि समूचे क्षत्रिय समाज ने इसका समर्थन किया, जो यह दर्शाता है कि यह मामला केवल राजनीतिक या व्यक्तिगत नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक और सामाजिक संघर्ष था।
करणी सेना का संदेश - हम इतिहास को बचाने के लिए एकजुट हैं
करणी सेना ने अपनी कार्रवाई के माध्यम से यह स्पष्ट संदेश दिया कि वे केवल अपने समुदाय की आवाज नहीं हैं, बल्कि वे पूरे भारतीय समाज के इतिहास और महान नायकों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं। करणी सेना के नेता, ओकेन्द्रा राणा ने सार्वजनिक तौर पर कहा कि अगर सुमन को माफी मांगनी है, तो उसे राणा संगाजी के स्मारक पर जाकर माफी मांगनी होगी। राणा संगाजी के प्रति यह श्रद्धा और सम्मान केवल व्यक्तिगत नहीं है, बल्कि यह एक समाज का प्रतीक है। ओकेन्द्रा राणा ने यह भी स्पष्ट किया कि करणी सेना अब चुप नहीं रहेगी और न ही यह केवल एक बार का विरोध होगा। उन्होंने कहा कि यह एक प्रतीकात्मक विरोध नहीं था, बल्कि यह एक गंभीर संदेश था कि अगर किसी ने हमारे नायकों का अपमान किया, तो हम खड़े होंगे और उनका बचाव करेंगे।
इस बयान से यह जाहिर हुआ कि करणी सेना समाज के इतिहास और संस्कृति को बचाने के लिए हर संभव कदम उठाएगी। यह विरोध समाज के उस हिस्से की आवाज था, जो अपनी ऐतिहासिक धरोहर से गहरी जुड़ाव महसूस करता है और किसी भी कीमत पर उसे नुकसान नहीं पहुंचने देना चाहता।
पुलिस कार्रवाई और बढ़ते विरोध के बीच मामला दर्ज
प्रदर्शन के दौरान पुलिस को स्थिति को नियंत्रित करने में मुश्किलें आईं। जब करणी सेना के प्रदर्शनकारियों ने हिंसक रूप धारण किया, तो पुलिस को लाठीचार्ज का सहारा लेना पड़ा। हालांकि, इस दौरान पुलिस की कार्रवाई ने विरोध को शांत नहीं किया, बल्कि करणी सेना के कार्यकर्ताओं ने अपना विरोध जारी रखा। यह दर्शाता है कि करणी सेना अपने नायकों और समाज के इतिहास की रक्षा के लिए कितनी दृढ़ निश्चयी है। विरोध इतना उग्र था कि आखिरकार सुमन के खिलाफ आगरा के हरिपर्वत थाने में शिकायत दर्ज की गई, और एक वकील ने सुमन और समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव के खिलाफ भी कोर्ट में मामला दायर किया।
यह कार्रवाई यह साबित करती है कि करणी सेना ने केवल एक आंदोलन नहीं खड़ा किया, बल्कि कानूनी और संवैधानिक तरीके से भी इस मुद्दे को उठाया। इसका मतलब यह था कि वे केवल शारीरिक विरोध नहीं कर रहे थे, बल्कि लोकतांत्रिक ढंग से इस मुद्दे को भी हल करने की कोशिश कर रहे थे।
करणी सेना का प्रदर्शन सही दिशा में था
करणी सेना ने इस विरोध से यह साबित कर दिया कि हमारे इतिहास और हमारे महान नायकों के खिलाफ किसी भी प्रकार का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जब कोई हमारे नायकों और इतिहास को निशाना बनाता है, तो यह सिर्फ हमारे समाज के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए एक चुनौती होती है। करणी सेना ने अपनी इस कार्रवाई के जरिए यह संदेश दिया कि अगर हमें अपने इतिहास को बचाना है, तो हमें खुद खड़ा होना होगा। राणा संगाजी और अन्य महान नायकों के प्रति यह सम्मान केवल शब्दों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसे हमारे कर्मों और कार्यों में भी दिखना चाहिए।
करणी सेना ने एक कदम आगे बढ़कर यह दिखाया कि वे न केवल शारीरिक रूप से, बल्कि मानसिक रूप से भी अपने इतिहास की रक्षा करने के लिए तैयार हैं। इस विरोध ने यह साबित किया कि इतिहास और संस्कृति की रक्षा के लिए हर भारतीय को एकजुट होना चाहिए, और अगर कोई हमारे नायकों का अपमान करता है, तो हमें उसकी सही जगह दिखानी चाहिए।
निष्कर्ष
करणी सेना ने यह साबित किया कि जब बात हमारे महान इतिहास और नायकों की होती है, तो हमें खड़ा होना चाहिए। उनका यह कदम इतिहास की रक्षा के लिए एक सही और जरूरी कदम था। यह केवल करणी सेना का विरोध नहीं था, बल्कि यह हमारे समाज की आवाज थी, जो अपने नायकों और इतिहास की रक्षा के लिए एकजुट हुआ।
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