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क्या महाराणा सांगा ने बाबर को हिंदुस्तान बुलाया था?

Did Maharana Sanga Invite Babur to Hindustan?
बाबर और महाराणा सांगा के बीच संघर्ष: क्या महाराणा सांगा ने बाबर को हिंदुस्तान बुलाया था? - Did Maharana Sanga Invite Babur to Hindustan?


इतिहास में यह सवाल बार-बार उठता है कि क्या महाराणा सांगा ने बाबर को भारत में आने के लिए बुलाया था? इस सवाल का जवाब काफी स्पष्ट है – नहीं, महाराणा सांगा ने बाबर को हिंदुस्तान नहीं बुलाया था।

दरअसल, बाबर ने खुद भारत में आक्रमण करने का निर्णय लिया था। 1526 में पानीपत की पहली लड़ाई में जीत के बाद बाबर ने दिल्ली पर कब्जा किया और अपनी साम्राज्यिक सीमाओं को फैलाने के लिए राजस्थान और अन्य उत्तर भारतीय क्षेत्रों की ओर निगाहें टेढ़ी की। बाबर ने बाबरनामा में अपनी विजय यात्रा का विस्तार से वर्णन किया है, लेकिन उसमें इस बात का कोई संकेत नहीं मिलता कि उसे हिंदुस्तान आने के लिए किसी ने निमंत्रण भेजा हो।

महाराणा सांगा, जो मेवाड़ के शासक थे, ने बाबर के खिलाफ संघर्ष के लिए राजपूतों और अन्य स्थानीय शासकों का एक गठबंधन तैयार किया था। उनका उद्देश्य अपनी मातृभूमि की रक्षा करना था, न कि बाबर को भारत बुलाना। 1527 में खानवा के युद्ध में बाबर की सेना ने भले ही जीत हासिल की, लेकिन महाराणा सांगा की वीरता और संघर्ष ने बाबर को कड़ी टक्कर दी और भारतीय इतिहास में अपनी अमिट छाप छोड़ी।

इतिहासे पुनः पुनः प्रश्नं यत्र यत्र प्रवर्तते,
किं महाराणा सांगं बाबरं भारतं आगन्तुं निमन्त्रयत्?
स्पष्टं उत्तरं तत्र विद्यात्, न, राणा संगं बाबरं न आमंत्रितवान्।
बाबरं आगन्तुं न स्वीकृतं, किन्तु दौलतख़ान् लोदी इब्राहीमस्य चाचं अलाउद्दीन लोदीने निमन्त्रणं प्रेषितम्।


इतिहास में यह सवाल बार-बार उठता है,

क्या महाराणा सांगा ने बाबर को भारत में आने के लिए बुलाया था?

इस सवाल का जवाब स्पष्ट है – नहीं, महाराणा सांगा ने बाबर को नहीं बुलाया था।

बाबर को भारत में आने के लिए कोई और नहीं, बल्कि दिल्ली सल्तनत के गवर्नर दौलत खान लोदी और इब्राहीम लोदी के चाचा अलाउद्दीन लोदी ने निमंत्रण भेजा था।

 





बाबर को कौन लाया था?



बाबर को भारत में आने के लिए कोई और नहीं बल्कि दिल्ली सल्तनत के गवर्नर दौलत खान लोदी और इब्राहीम लोदी के चाचा अलाउद्दीन लोदी ने निमंत्रण भेजा था। 1525 में, बाबर ने इब्राहीम लोदी के खिलाफ भारत में आक्रमण करने का फैसला किया। बाबर ने इब्राहीम लोदी के खिलाफ अपनी दावेदारी प्रस्तुत करने के लिए एक राजदूत भेजा था, जिसमें उसने खुद को दिल्ली का असली उत्तराधिकारी घोषित किया। बाबर ने यह दावा किया था कि वह इब्राहीम लोदी से ज्यादा योग्य था और दिल्ली की गद्दी का हकदार था।

हालांकि, इब्राहीम लोदी ने बाबर के राजदूत को लाहौर में गिरफ्तार कर लिया और उसे महीनों तक बंदी बनाए रखा। बाद में बाबर के राजदूत को रिहा कर दिया गया और यह घटना बाबर के लिए एक संकेत बनी कि दिल्ली सल्तनत में सत्ता की कमजोरी है, जिसके बाद उसने भारत पर आक्रमण करने की योजना को आगे बढ़ाया।


क्या बाबरनामा में लिखा है कि बाबर को महाराणा सांगा ने निमंत्रण दिया था?



यह दावा कि बाबरनामा में बाबर को महाराणा सांगा ने निमंत्रण दिया था, गलत हो सकता है। दरअसल, बाबरनामा में ऐसी कोई बात नहीं लिखी गई है। बाबर ने खुद भारत पर आक्रमण करने का निर्णय लिया था, और उसका उद्देश्य दिल्ली सल्तनत की सत्ता पर कब्जा करना था।

यह भी सही है कि महाराणा सांगा के पास एक बहुत बड़ी सेना थी, और उन्होंने बाबर को कई बार चुनौती दी थी। महाराणा सांगा ने न केवल बाबर को खानवा के युद्ध (1527) में कड़ी टक्कर दी, बल्कि इससे पहले भी उन्होंने बाबर के खिलाफ कई संघर्षों में उसे हराया था। राणा सांगा ने बाबर को दो बार युद्ध में हराया था, और एक बार तो उन्होंने बाबर को बहुत बड़ी हार भी दी थी।

अगर महाराणा सांगा के पास इतनी ताकतवर सेना थी और वह बाबर से पहले ही कई बार भिड़ चुके थे, तो वह बाबर को क्यों बुलाते? यह सवाल स्वाभाविक है। दरअसल, महाराणा सांगा ने कभी बाबर को भारत बुलाया नहीं था, बल्कि उन्होंने उसे अपनी भूमि से बाहर रखने के लिए संघर्ष किया। बाबर ने बाबरनामा में अपने आक्रमणों के बारे में विस्तार से लिखा है, लेकिन उसमें यह नहीं बताया गया कि महाराणा सांगा ने उसे निमंत्रण दिया था।


निष्कर्ष


इतिहास के इस महत्वपूर्ण सवाल पर विचार करते हुए यह कहना सही होगा कि महाराणा सांगा ने बाबर को भारत बुलाया था, यह पूरी तरह से गलत है। बाबर ने अपनी आक्रमणकारी योजनाओं को स्वयं तैयार किया था, और महाराणा सांगा ने अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए उसका सामना किया।

बाबर ने खुद भारत में आक्रमण करने का निर्णय लिया और इस कदम के पीछे मुख्य कारण दिल्ली सल्तनत में सत्ता की कमजोरी थी। महाराणा सांगा ने अपनी भूमि और सम्मान की रक्षा के लिए संघर्ष किया, और खानवा के युद्ध में उनकी वीरता ने इतिहास में अपनी विशेष पहचान बनाई।

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